मनुष्य जन्म मिला है हमें,
शायद कोई अच्छे कर्म किए होंगे।
न वक़्त जाया कर अपना,अंधी ख्वाहिशों में।

क्या लेके आए थे हम, जो हम लेके जाएंगे।
सब कुछ यही था, यही है, और यही रहेगा।

न वक़्त जाया कर अपना,अंधी ख्वाहिशों में।

आए थे मुसाफिर बन कर, खुदको मालिक समझ बैठे।
कुदरत ने खेला ऐसा खेल, अपनी ही आज़ादी गवा बैठे।

न वक़्त जाया कर अपना,अंधी ख्वाहिशों में।

संभल जा ये इंसान, अभी भी वक़्त है।
न कुछ तेरा है, न मेरा है।
सब खाली हाथ आए थे, खाली हाथ ही जाएंगे।

न वक़्त जाया कर अपना,अंधी ख्वाहिशों में।

ख्वाहिशें न किसिकी पूरी हुई,
न तेरी होगी, न मेरी ।
बस, दुआ कर की तू खुश रहे सदा,
और तेरी खुशी में सबकी रजामंदी रहे ।